ramayan katha - ramayan story in hindi | रामायण कथा संपूर्ण कहानी।

हेलो दोस्तो क्या आप भी ramayan katha को short में पढ़ना चाहते हो?


तो यह लेख आपके लिए है क्युकी मेने ramayan katha को पूरा पढ़ा है। और मैने इसमें से बहुत सारे अच्छी बाते और अच्छे ज्ञान को दिया है।


ramayan katha - ramayan story in hindi


दोस्तो मेने ramayan katha में बहुत से अच्छे Topic पढ़ कर लिखे है।  दोस्तो ramayan katha 1 संस्कृत महाकाव्य है जिसकी रचना महर्षि वाल्मीकि ने की थी।


दोस्तों यह भारतीय साहित्य के दो विशाल महाकाव्यों में से एक है जिसमें दूसरा महाकाव्य महाभारत है हिंदू धर्म में ramayan katha का एक महत्वपूर्ण स्थान है जिसमें हम सबको रिश्तो के कर्तव्य को समझाया गया है रामायण महाकाव्य में एक आदर्श पिता आदर्श पुत्र आदर्श पत्नी आदर्श भाई आदर्श मित्र और आदर्श राजा को दिखाया गया है।


इस महाकाव्य में भगवान विष्णु के राम अवतार को दर्शाया गया है रामायण महाकाव्य में 2400 छंद 500 सर्ग भागों में विभाजित है।


ramayan ki katha में पहले बालकांड के बारे में बताया जाता है।


बालकांड बहुत समय पहले की बात है सरयू नदी के किनारे कोसला नाम का राज्य था जिसकी राजधानी अयोध्या थी। अयोध्या के राजा का नाम दशरथ था। जिनकी तीन पत्नियां थी जिनका नाम कौशल्या, केकई और सुमित्रा राजा दशरथ बहुत समय तक निसंतान थे। और अपने सूर्य वंश की वृद्धि के लिए अपने उत्तर अधिकारी के लिए बहुत चिंतित थे।


राजा दशरथ ने अपने कुलगुरू ऋषि वशिष्ठ की सलाह मानकर पुत्र कमेटी यज्ञ कराया उस यज्ञ के फल स्वरुप राजा दशरथ को 4 पुत्र प्राप्त हुए उनकी पहली पत्नी कौशल्या से प्रभु श्रीराम और केकई से भरत और सुमित्रा से लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ उनके चारों पुत्र दिव्य शक्तियों से परिपूर्ण और यशस्वी थे।

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उन चारों को राजकुमारों की तरह पाला गया और उनको शास्त्रों और युद्ध कला की सीख भी दी गई प्रभु श्री राम 16 वर्ष के हुए तब तक एक बार ऋषि विश्वामित्र राजा दशरथ के पास आए। और अपने यज्ञ में विघ्न उत्पन्न करने वाले राक्षसों के आतंक के बारे में राजा दशरथ को बताया।


ऋषि विश्वामित्र की बात सुनकर राजा दशरथ उनकी सहायता करने के लिए तैयार हो गए। ऋषि विश्वामित्र ने इस कार्य के लिए राम और लक्ष्मण का चयन किया राम और लक्ष्मण ऋषि विश्वामित्र के साथ उनके आश्रम गए उनके यज्ञ में विघ्न डालने वाले राक्षसों का नाश किया इसे ऋषि विश्वामित्र प्रसन्न होकर राम और लक्ष्मण को अनेक दिव्यास्त्र प्रदान करते हैं जिनसे आगे चलकर प्रभु श्री राम और लक्ष्मण अनेक दानवों का नाश करते हैं।


माता सीता का जन्म कैसे हुआ?


ramayan katha में दूसरी तरफ मिथिला नरेश जो कि निसंतान थे संतान प्राप्ति के लिए वह बहुत चिंतित थे उन्हें कुंड में बच्ची मिली तब राजा जनक की खुशी का ठिकाना ना रहा राजा जनक उस बच्ची को भगवान का वरदान मान कर अपने महल में ले गए। उन्होंने उसका नाम सीता रखा राजा जनक अपनी पुत्री सीता को बहुत अधिक प्रेम करते थे सीता धीरे-धीरे बढ़ी हुई थी और अद्वितीय सुंदरता से परिपूर्ण थी जब सीता विवाह योग्य हुई तब राजा जनक अपनी प्रिय पुत्री सीता के लिए उनका स्वयंवर करने लगे।


राम और सीता का विवाह कैसे हुआ?


राजा जनक ने सीता के स्वयंवर में शिव का धनुष उठाने का और उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने की शर्त रखी सीता के गुण और सुंदरता की चर्चा पहले ही चारों तरफ फैल चुकी थी। सीता के स्वयंवर की बात सुनकर बहुत सारे राजा, सीता स्वयंवर में भाग लेने के लिए आने लगे ऋषि विश्वामित्र राम और लक्ष्मण के साथ सीता स्वयंवर में पहुंचे। जब सीता से शादी करने की इच्छा लिए दूर-दूर के राजा महाराजा स्वयंवर में एकत्रित हुए। सीता स्वयंवर आरंभ हुआ सारे राजाओं ने शिव धनुष को उठाने की कोशिश की लेकिन उठा नहीं पाए तब यह देखकर राजा जनक बहुत चिंतित हो गए।

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तब उन्होंने ऋषि विश्वामित्र से कहा कि वह उनकी चिंता को दूर करें और श्री विश्वामित्र ने अपने शिष्य राम से इस धनुष को उठाने के लिए कहा प्रभु राम अपने गुरु को प्रणाम करके उठे और उन्होंने धनुष को बड़ी सरलता से उठा लिया, और उस पर प्रत्यंचा भी चढ़ा दी, प्रत्यंचा चढ़ाने लगे तो धनुष टूट गया राजा दशरथ की शर्त के अनुसार प्रभु श्रीराम से सीता का विवाह हुआ।


ramayan ki katha में अब अयोध्या काण्ड के बारे में बताया जाता है।


अयोध्या कांड राम और सीता के विवाह को 12 वर्ष बीत गए थे राजा दशरथ वृद्ध हो गए थे। वह अपने बड़े बेटे राम को अयोध्या के सिंहासन पर बिठाना चाहते थे तब एक शाम राजा दशरथ की दूसरी पत्नी केकई चतुर मंथरा के बहकावे में आकर राजा से दो वचन मांगने लगी। जो राजा दशरथ ने कई वर्ष पहले देने का वचन दिया था। केकई ने राजा दशरथ से अपने पहले वचन के रूप में राम को 14 वर्ष का वनवास और दूसरे वचन के रूप में अपने पुत्र भरत को अयोध्या के राज सिंहासन पर बैठने की बात कही गई थी।


केकई के दोनों वचनों को सुनते ही राजा दशरथ का दिल टूट गया ना चाहते हुए भी राजा दशरथ अपने प्रिय पुत्र राम को बुलाकर 14 वर्ष के लिए वनवास जाने को कहा राम ने अपने पिता राजा दशरथ का बिना कोई विरोध किए उनका आदेश स्वीकार कर लिया। सीता और लक्ष्मण को प्रभु राम के वनवास जाने के बारे में पता चला तो उन्होंने भी राम के साथ वनवास जाने का आग्रह किया।

जब राम ने अपनी पत्नी सीता को अपने साथ वन में ले जाने से मना किया तब सीता ने प्रभु राम से कहा कि जिस वन में आप जाएंगे वही मेरा अयोध्या है और आपके बिना अयोध्या मेरे लिए नर्क समान है


इस दौरान भरत जो अपने मामा के यहां गए हुए थे। अयोध्या की घटना सुनकर बहुत ही ज्यादा दुखी हुए भारत ने अपनी मांता केकई को अयोध्या के राज सिंहासन पर बैठने से मना कर दिया और वह भी अपने भाई राम को ढूंढने वन में चले गए। वन में जाकर भरत, राम लक्ष्मण और सीता से मिले उनसे अयोध्या वापस लौटने का आग्रह किया।

तब राम ने अपने पिता के वचन का पालन करते हुए अयोध्या वापस नहीं लौटने का प्रण लिया। और तब भारत ने भगवान राम की चरण पादुका अपने साथ अयोध्या वापस लेकर उन्हें ही राज सिंहासन पर रख दिया।


ramayan ki katha में अब अरण्यकांड के बारे में बताया जाता है।


अरण्यकांड, भगवान राम के वनवास को 13 वर्ष बीत गए थे वन वाश का अंतिम वर्ष चल रहा था भगवान राम सीता और लक्ष्मण गोदावरी नदी के किनारे जा रहे थे। गोदावरी के निकट एक जगह सीता जी को बहुत पसंद आई उस जगह का नाम था पंचवटी भगवान राम अपनी पत्नी की भावना को समझते हुए शेष वनवास वही बताने का निर्णय लेने लगे वहीं पर उन्होंने अपनी कुटिया बनाई।


सीता का अपहरण कैसे हुआ?


पंचवटी के जंगलों में 1 दिन शुर्फनका नाम की राक्षसी औरत ने लक्ष्मण को अपने रंग रूप से लूभाना चाहती थी जिसमें वह असफल रही। उसने सीता को मारने का प्रयास किया तब लक्ष्मण ने शुर्फनका की नाक और कान काट दिए।


इस बात की खबर शुर्फनका के राक्षस भाई को पता चली वह अपने साथियों के साथ राम, लक्ष्मण, सीता की कुटिया पर आक्रमण करने आ गया तो भगवान राम और लक्ष्मण ने सभी राक्षसों का वध कर दिया।

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जब इस घटना की खबर शुर्फनका के दूसरे भाई रावण तक पहुंची तो उसने राक्षस मरीचि की मदद से भगवान राम की पत्नी का अपहरण कर लिया। जब रावण सीता को बलपूर्वक अपने पुष्पक विमान में जा रहा था। तो जटायु नाम का गिद्ध उन्हें रोकने की कोशिश करने लगा जटायु ने माता सीता की रक्षा करने का बहुत प्रयास किया। जिसमें वह प्राणघातक रूप से घायल हो गया।

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रावण सीता को अपने पुष्पक विमान से उड़ाकर लंका ले गया। और रकस्सियो की कड़ी सुरक्षा में लंका की अशोक वाटिका में डाल दिया फिर रावण ने माता सीता के सामने उनसे विवाह करने की इच्छा प्रकट की लेकिन माता सीता अपने पति भगवान राम के प्रति समर्पित होने के कारण विवाह का मना कर दिया। इधर भगवान राम और लक्ष्मण माता सीता के अपहरण के बाद उनकी खोज करने लगे उनकी खोज करते करते वह मिले जटायु से जटायु ने बताया कि लंकापति रावण सीता माता को उठाकर ले गया है।


श्री राम और लक्ष्मण हनुमान से कैसे मिले?


भगवान राम और लक्ष्मण जब माता सीता की खोज कर रहे थे तब उनकी मुलाकात राक्षस का बंद और परमतेजश्वी शबरी से हुई उन दोनों ने उन्हें सुग्रीव और हनुमान तक पहुंचाया और सुग्रीव से मित्रता करने का सुझाव दिया है।


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ramayan ki katha में अब किष्किंधा के बारे में बताया जाता है।


ramayan ki katha में किष्किंधा कांड वानरों के घर पर आधारित है भगवान राम वहां पर अपने सबसे बड़े भक्त हनुमान से मिले। महाबली हनुमान वानरों में सबसे महान नायक और सुग्रीव के पक्षपाती थे। हनुमान की मदद से भगवान राम और सुग्रीव की मित्रता हुई सुग्रीव ने भगवान राम से अपने भाई बाली को मारने में उनकी मदद मांगी तब भगवान राम ने बाली का वध किया और सुग्रीव को किष्किंधा का शासन मिल गया।


बदले में सुग्रीव ने भगवान राम को उनकी पत्नी माता सीता को खोजने में भी सहायता करने का वचन दिया। कुछ समय तक सुग्रीव अपने वचन को भूलकर अपने राज सूख मजा लेने में मग्न हो गया।


तब बाली की पत्नी तारा ने इस बात की खबर लक्ष्मण को दी और लक्ष्मण ने सुग्रीव को संदेश भिजवाया कि वह अपना वचन भूल गया है तो वानरगढ़ को तबाह करना निश्चित है तब सुग्रीव को अपना वचन याद आया और लक्ष्मण की बात मानते हुए अपने वानर के दलो को संसार के चारों कोनों में माता सीता की खोज में भेजने लगा। अंगद और हनुमान को जटायु का बड़ा भाई संपाती यह सूचना देता है कि माता सीता को लंका पति नरेश रावण बलपूर्वक लंका ले गया है।


ramayan ki katha में अब सुंदरकांड के बारे में बताया जाता है।


जटायु के भाई संपाती से माता सीता के बारे में खबर मिलते ही हनुमान जी ने अपना विशाल रूप धारण किया। और विशाल समुद्र को पार कर लंका पहुंच गए। हनुमान जी लंका पहुंच कर वहां माता सीता की खोज में लग गए बहुत खोजने के बाद हनुमान को सीता अशोक वाटिका में मिली। जहां पर रावण की बहुत सारी राक्षसी दासिया माता सीता को रावण से विवाह करने के लिए बातें कर रही थी।


सभी राक्षसी दासियों के चले जाने के बाद हनुमान माता सीता तक पहुंचे और उनको भगवान राम की अंगूठी देकर अपने राम भक्त होने की पहचान कराई हनुमान जी ने माता सीता को भगवान राम के पास ले जाने को कहा।


लेकिन माता सीता ने यह कहकर इंकार कर दिया कि भगवान राम के अलावा वो किसी और के साथ नहीं जाएंगे माता सीता ने कहा कि प्रभु राम उन्हें खुद लेने आएंगे और अपने अपमान का बदला लेंगे हनुमान जी माता सीता से आज्ञा लेकर अशोक वाटिका में पेड़ों को उखाड़ना और तबाह करना शुरू कर देते हैं इसी बीच हनुमान जी रावण के पुत्र अक्षय कुमार का भी वध देते हैं रावण का दूसरा पुत्र मेघनाथ हनुमान जी को बंधी बनाकर रावण के समक्ष हाजिर करता है।


हनुमान जी ने लंका में आग कैसे लगाई?


हनुमान जी रावण के दरबार में रावण के समक्ष राम की पत्नी सीता को छोड़ने के लिए रावण को समझाते हैं। रावण क्रोधित होकर हनुमान जी की पूंछ में आग लगाने का आदेश देता है। हनुमान जो की पूछ में आग लगते ही वह कूद कर एक महल से दूसरे महल एक छत से दूसरी छत पर जाकर पूरी लंका नगरी में आग लगा देते हैं। और वापस विशाल रूप धारण कर किशकिंदा पहुंच जाते हैं। वहां पहुंचकर हनुमान जी भगवान राम और लक्ष्मण को माता सीता की सारी सूचना देते हैं।

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ramayan ki katha में अब लंकाकाण्ड के बारे में बताया जाता है।


लंकाकांड जो कि युद्ध कांड के नाम से भी जाना जाता है। भगवान राम की सेना और रावण की सेना के बीच युद्ध को दर्शाया गया है। भगवान राम को जब अपनी पत्नी सीता की सूचना हनुमान से प्राप्त होती है। तब भगवान राम और लक्ष्मण अपने साथियों के साथ दक्षिणी समुद्र के किनारे पहुंचते हैं भगवान राम की मुलाकात रावण के भाई विभीषण से होती है। जो रावण और लंका की पूरी जानकारी भगवान राम को देता है। नल और नील नमक दो वानरों की सहायता से पूरा वानर दल मिलकर समुद्र को पार करने के लिए राम सेतु का निर्माण करते हैं।


रावण का वध।


भगवान राम और उनकी वानर सेना लंका पहुंच सके लंका तक पहुंचने के बाद भगवान राम और लंकापति रावण का भीषण युद्ध होता है जिसमें भगवान राम रावण का वध कर देते हैं इसके बाद प्रभु राम ने विभीषण को लंका का सिंहासन दिया।

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भगवान राम माता सीता से मिलने पर उन्हें अपनी पवित्रता सिद्ध करने के लिए अग्निपरीक्षा से गुजरने को कहते है। क्योंकि प्रभु राम माता सीता की पवित्रता के लिए फैली अफवाहों को गलत साबित करना चाहते हैं। जब माता सीता अग्नि में प्रवेश करती हैं तो उन्हें कोई नुकसान नहीं होता। अब भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण वनवास की अवधि समाप्त कर अयोध्या लौट जाते हैं।


अयोध्या में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ भगवान राम का राज्य अभिषेक होता है। इस तरह से रामराज्य की शुरुआत होती है l।


ramayan ki katha में अब उत्तरकांड के बारे में बताया जाता है।


दोस्तों उत्तरकांड महर्षि वाल्मीकि की वास्तविक कहानी का अंश माना जाता है। इस कांड में भगवान राम के राजा बनने के बाद भगवान राम अपनी पत्नी माता सीता के साथ सुखद जीवन व्यतीत करते हैं। कुछ समय के बाद माता सीता गर्भवती हो जाती है। जब अयोध्या के वासियों को माता सीता की अग्नि परीक्षा की खबर मिलती है। तो आम जनता और प्रजा के दबाव में आकर भगवान राम की पत्नी सीता को वन भेज देते हैं।


लव और कुश का जन्म।


वन में महर्षि वाल्मीकि माता सीता को अपने आश्रम में आश्रय देते हैं। और वहीं पर माता सीता भगवान राम के दो जुड़वा पुत्र लव और कुश को जन्म देती है लव और कुश महर्षि वाल्मीकि के शिष्य बन जाते हैं।


उनसे शिक्षा ग्रहण करते हैं महर्षि वाल्मीकि ने ramayan katha की रचना ग्रहण और लव कुश को ज्ञान दिया। बाद में भगवान राम अश्वमेध यज्ञ का आयोजन करते हैं।

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जिसमें महर्षि वाल्मीकि और उनकी जनता के समक्ष लव और कुश महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित भगवान राम और उनकी जनता के समक्ष लव और कुश महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित ramayan katha का गायन करते हैं। गायन करते हुए लव कुश को माता सीता को वनवास दिए जाने की खबर सुनाई जाती है। भगवान राम बहुत दुखी होते हैं, उसी समय भगवान राम को माता सीता लव कुश के बारे में बताती हैं।


माता सीता और प्रभु राम की जीवन समाप्ति।


भगवान राम को ज्ञात होता है कि लव-कुश उनके पुत्र हैं और फिर माता सीता धरती मां की गोद में समा जाती हैं धरती के फटने पर माता सीता धरती की गोद में जाती है कुछ वर्षों के बाद वैद दूत आकर भगवान राम को सूचना देते हैं कि उनके राम अवतार का प्रयोजन पूरा हो गया है।


उनका यह जीवन काल भी खत्म हो चुका है। तब भगवान राम अपने सभी सगे संबंधी और गुरुजनों का आशीर्वाद लेकर सरायू नदी में प्रवेश करते हैं। और वहीं से अपने वास्तविक विष्णु रूप धारण कर अपने धाम को चले जाते हैं।

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ramayan katha में आपको राम के संपूर्ण जीवन के बारे में बताया है। और कैसे श्री राम ने सभी रक्षसो का वध कर दिया।


दोस्तो यह से ramayan katha खत्म हो जाती है। अगर आपको इसे पढ़ने में आनंद का अनुभव हुआ तो इसे अपने दोस्तो और परिवार के साथ भी share कीजिए। 


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